पारस अस्पताल रांची में दिल के पेरीकार्डियम की मोटी परत को हटके डॉक्टरों ने मरीज़ को दिया नया जीवनदान

45वर्षीय मरीज़ को सांस लेने में हो रही थी परेशानी। टीबी के बीमारी की वजह से हृदय को घेरी हुई परत हो गई थी मोटी -सर्जरी के द्वारा इस मोटी परत को हटाया गया।

Jul 18, 2022 - 11:45
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पारस अस्पताल रांची में दिल के पेरीकार्डियम की मोटी परत को हटके डॉक्टरों ने मरीज़ को दिया नया जीवनदान

रांची :
पारस अस्पताल में एक 45 वर्षीय मरीज़ की हृदय के आसपास होने वाली परिकार्डिम की मोटी परत को हटाकर उसे नया जीवनदान दिया गया। रांची के रहने वाले विजय कुमार मिश्रा को काफी समय से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, साथ ही शरीर में भी सूजन आ गई थी। कई जगह इलाज कराने के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था।

जब मरीज को रांची स्थित पारस एचईसी अस्पताल लाया गया तो डॉक्टरों द्वारा जांच में पाया गया की दिल के आसपास जो परत होती है जिसे परिकार्डियम कहा जाता है वो परत मोटी हो गई है, जिस कारण मरीज को ये सभी दिक्कतें आ रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक विजय कुमार मिश्रा को पहले से टीबी की बीमारी है जिससे ये परत मोटी हुई।

केस के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. नरेंद्र भोंसले, सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियक सर्जन, पारस एचईसी अस्पताल, रांची ने बताया कि, ” मानव शरीर में आमतौर पर दिल के आसपास ये परत पतली होती है लेकिन अगर किसी कारण वश ये परत मोटी हो जाती है तो दिल सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता है। विजय कुमार मिश्रा में टीबी का कारण ये परत मोटी हो गई थी जिसे सर्जरी करके हटा दिया गया है जिसके बाद अब उनका दिल सामान्य रूप से काम कर रहा है और सांस लेने में भी तकलीफ नहीं हो रही है। इस सर्जरी को पेरिकार्डियोक्टोमी सर्जरी कहा जाता है।”

“अगर दिल के आसपास की परत पतली हो तो दिल को सुरक्षित रखता है लेकिन अगर परत मोटी हो जाए हृदय सही से विस्तार नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में सर्जरी के जरिए इस परत को हटाया जाता है। परत मोटी होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, कैंसर, वायरल इन्फेक्शन आदि। लेकिन सही समय पर इलाज मिलने से मरीज़ स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकता है, डॉ भोंसले ने बताया।”

विजय कुमार मिश्रा की पेरिकार्डियोक्टोमी सर्जरी के जरिए इस परत को हटाया गया जिसमे 3 घंटे का समय लगा। जिसके बाद अब वो बिल्कुल स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। लेकिन सावधानी के तौर पर बहुत जरूरी है की मरीज का टीबी का इलाज पूरा हो और वो दवाई का कोर्स भी पूरा करें।

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