केंद्र ने नहीं काटे डीवीसी की तीसरी किस्त के 714 करोड़, झारखंड सरकार को मिली बड़ी आर्थिक राहत

दामोदर घाटी निगम का दावा है कि झारखंड बिजली वितरण निगम पर उसका कुल बकाया 4949 करोड़ 56 लाख का है। जबकि झारखंड सरकार इसे मात्र 3558 करोड़ 68 लाख मानती है। त्रिपक्षीय करार में यही तय हुआ था कि पहले झारखंड अविवादित 3558 करोड़ का झारखंड भुगतान कर दे,

May 23, 2021 - 13:20
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केंद्र ने नहीं काटे डीवीसी की तीसरी किस्त के 714 करोड़, झारखंड सरकार को मिली बड़ी आर्थिक राहत

रांची: कोरोना काल में राज्य को इससे बड़ी आर्थिक राहत मिली है. कोरोना राहत के लिए कोष के संकट का काफी हद तक समाधान हुआ है. भारत सरकार ने दामोदर घाटी निगम के बकाए की 714 करोड़ की तीसरी किस्त झारखंड के खाते से नहीं काटी है।

कोरोना से पैदा हालात देखने के बाद भारत सरकार अब जुलाई में तीसरी किस्त झारखंड के खाते से काटने पर विचार करेगी। झारखंड सरकार की ओर से डीवीसी के बकाये की तीसरी किस्त काटे जाने को ध्यान में रखकर ही योजना बनाई गई थी। परंतु अप्रैल अंत में मियाद पूरी होने के लगभग महीने भर बाद झारखंड सरकार को केंद्र के फैसले की जानकारी दी गई है। को बताते चलें की इससे पहले अक्टूबर 2020 में 1417 करोड़ की पहली किस्त काटी गई थी। जनवरी 2021 में रिजर्व बैंक स्थित झारखंड सरकार के खाते से 714 करोड़ की दूसरी किस्त काट ली गई। केंद्र ने अप्रैल और जुलाई के अंत में 714 करोड़ के दो किस्तों की मियाद तय की,

गौरतलब है की झारखंड बिजली वितरण निगम पर दामोदर घाटी निगम के बढ़ते बकाये को देखते हुए झारखंड सरकार, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच त्रिपक्षीय करार हुआ था। इसके तहत तय समय में  दामोदर घाटी निगम को बिल का भुगतान नहीं करने पर भारत सरकार डीओ लेटर जारी कर रिजर्व बैंक के माध्यम से झारखंड के खाते से राशि काट लेगी। इसी के तहत चार किस्तों में राशि काटने की मियाद तय की गई। झारखंड के मंत्रिपरिषद ने पिछली छह जनवरी को इस त्रिपक्षीय समझौते से निकलने का फैसला लिया। इसमें कहा गया था रिजर्व बैंक के खाते से कल्याणकारी योजनाओं की राशि में से पैसे काटे गए हैं। इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। झारखंड राज्य मंत्रिपरिषद के फैसले के हफ्ते भर बाद ही केंद्र सरकार ने डीवीसी के बकाये की दूसरी किस्त काट ली। 

दामोदर घाटी निगम का दावा है कि झारखंड बिजली वितरण निगम पर उसका कुल बकाया 4949 करोड़ 56 लाख का है।  जबकि झारखंड सरकार इसे मात्र 3558 करोड़ 68 लाख मानती है। त्रिपक्षीय करार में यही तय हुआ था कि पहले झारखंड अविवादित 3558 करोड़ का झारखंड भुगतान कर दे, उसके बाद डीवीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम के प्रतिनिधि बैठकर विवादित 1391 करोड़ के बकाये का नए सिरे से आकलन करेंगे। चर्चा है कि तीसरी किस्त काटने में केंद्र सरकार के नरम रुख के बाद दोनों पक्ष इस दिशा में समाधान की आगे भी बात कर सकते हैं।

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