भाद्रपद की सोमवती अमावस्या के दिन शुभ मुहूर्त में पूजन-स्नान करना अत्यंत फलदायी 

सोमवती अमावस्या (दो  सितंबर) पर विशेष :::

Sep 2, 2024 - 18:41
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भाद्रपद की सोमवती अमावस्या के दिन शुभ मुहूर्त में पूजन-स्नान करना अत्यंत फलदायी 

अपराजिता राठौर 

भाद्रपद अमावस्या इस बार 02 सितंबर (सोमवार) को पड़ रही है।  सोमवार के दिन आने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
यूं तो हिंदू धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। लेकिन विशेषकर भाद्रपद में पड़ने वाली यह तिथि अधिक शुभ मानी जाती है।
 वर्ष भर में 12 अमावस्या तिथियां होती हैं। सभी का अलग-अलग महत्व होता है। सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। भाद्रपद अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदाई होता है। भाद्रपद माह में सोमवार के दिन पड़ने वाले सोमवती अमावस्या का हिंदू धर्म में आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर भगवान शिव और देवी पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख,शांति और समृद्धि बढ़ती है। इस दिन स्नान, ध्यान और दान-पुण्य करने से समस्त पापों से मुक्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिल जाती है। 
भाद्रपद अमावस्या के दिन घर में पड़े पुराने वस्त्रों को नदी में विसर्जित कर देने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि घर में रखे पुराने व न पहनने वाले वस्त्रों से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। भाद्रपद अमावस्या के दिन पवित्र नदी में जलता हुआ कपूर विसर्जित करने से  ग्रह दोष, वास्तु दोष, पितृ दोष आदि दूर होते हैं। इसके अलावा अगर पान के पत्ते पर कपूर जलाकर पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाए, तो इससे शुभ कार्यों में सफलता मिलने लगती है।
 हिंदू धर्म ग्रंथों, शास्त्रों के मुताबिक काले तिल का संबंध पितरों और शनिदेव से माना गया है। जहां एक ओर काले तिल के प्रभाव से पितृ शांत होते हैं, वहीं  काले तिल को शनि देव के निमित्त चढ़ाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
 ऐसे में अगर भाद्रपद अमावस्या के दिन काले तिल पवित्र नदी में विसर्जित किए जाएं, तो इससे शनि देव की कृपा और पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।

भाद्रपद अमावस्या पर दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी 

  सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान कर दान-पुण्य करना अत्यंत फलदाई माना जाता है। यदि नदी में स्नान न कर पाएं तो ब्रह्म मुहूर्त के स्नान के समय नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर नहाएं।
इससे नदी स्नान के समान ही पुण्य की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही स्नान आदि से मुक्त होकर सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें अक्षत और कुमकुम मिलाकर अर्ध्य देंगे, तो लाभदाई हो सकता है।  मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन गाय को घी लगी हुई रोटी और गुड़ खिलाने से भी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  इस दिन किसी पशु या बुजुर्ग व्यक्ति का अपमान भूल करके भी न करें। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल पर जल चढ़ाना और वहां दीपक जलाना बहुत ही शुभ माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में पूजन-स्नान और दान आदि करने से खुशहाली बनी रहती है। इस दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान भी किया जाता है। 
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन जो श्रद्धालु शिवलिंग का अभिषेक करता है और साथ में माता पार्वती का पूजन करता है, उसकी  सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
 (लेखिका पटना जिले के जमुनापुर निवासी छात्रा हैं)

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