हजारीबाग संसदीय क्षेत्र की जनता की चुप्पी बनी एक पहेली

मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के मनीष जायसवाल और कांग्रेस पार्टी के जे.पी.भाई पटेल से है। यह चुनाव कई मायने में बहुत ही दिलचस्प बन गया है। एक ओर अगर उम्मीदवार चतुर बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मतदाता भी कम चतुर नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों उम्मीदवारों को इस संसदीय क्षेत्र की जनता वोट देने का आश्वासन दे रही है।

May 19, 2024 - 17:00
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हजारीबाग संसदीय क्षेत्र की जनता की चुप्पी बनी एक पहेली

हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में जनता की चुप्पी एक पहेली बनी हुई है। इस चुनाव में जनता का रुख किसी ओर है ? कोई स्पष्ट पिक्चर उभर कर सामने नहीं आ पा रही। इस चुनाव में सत्रह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सभी उम्मीदवार अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, इसके साथ ही सभी उम्मीदवार अपनी ओर से चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह जोर लगा दिए हैं।‌ हर एक उम्मीदवार घर-घर जाकर चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। कई उम्मीदवार हैंड मिल के माध्यम से सीधे लोगों से मिल रहे हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के मनीष जायसवाल और कांग्रेस पार्टी के जे.पी.भाई पटेल से है। दोनों के बीच कांटे का संघर्ष बताया जा रहा है। इस संसदीय क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इन पांचों क्षेत्र में में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के‌ ही कार्यकर्ता ज्यादा नजर आ रहे हैं । यह चुनाव कई मायने में बहुत ही दिलचस्प बन गया है। एक ओर अगर उम्मीदवार चतुर बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मतदाता भी कम चतुर नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों उम्मीदवारों को इस संसदीय क्षेत्र की जनता वोट देने का आश्वासन दे रही है। लेकिन जनता का मिजाज क्या है? यह पता ढंग से नहीं लग पा रहा है।
मनीष जायसवाल और जे.पी. भाई पटेल दोनों विधायक हैं। दोनों पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों को अपने-अपने क्षेत्र में काम करने का अच्छा अनुभव है । दोनों जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में हमेशा सक्रिय रहने वाले नेता हैं। मनीष जायसवाल दो बार विधायक रहे हैं । वहीं जे.पी. भाई पटेल मांडू विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2014 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर मांडू विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे । उन्होंने महेश सिंह को लगभग सात हजार वोटो से पराजित किया था। वही मनीष जायसवाल भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 2004 में हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। मनीष जायसवाल ने कांग्रेस पार्टी के सौरभ नारायण सिंह को भारी मतों के अंतर से घर आया था। जे.पी. भाई पटेल 2019 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर मांडू विधानसभा से लड़े थे। मांडू की जनता ने उन्हें अपना नैतिक समर्थन दिया था। वे दोबारा विधानसभा सदस्य के लिए चुन ले गए थे। वही भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर मनीष जायसवाल 2019 में हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। एक बार फिर विजयी हुए थे।
2024 के लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही यह पता चल गया था कि हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी आलाकमान का कोई नया उम्मीदवार देने जा रही है । तब लोगों का ध्यान मनीष जायसवाल की ओर गया था। इस बाबत पत्रकारों ने जब मनीष जायसवाल पूछा था तब उन्होंने कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं है ।‌ लेकिन कुछ दिनों में हजारीबाग के सीटिंग सांसद जयंत सिन्हा का टिकट काटकर मनीष जायसवाल के नाम की घोषणा भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने कर दी थी। तब तक कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में किसी की भी घोषणा नहीं हुई थी ।
जैसे ही मनीष जायसवाल का नाम भारतीय जनता पार्टी की ओर से हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने का आया।‌ हजारीबाग के पूर्व सांसद यशवंत सिन्हा सक्रिय हो गए। हजारीबाग पहुंचते ही उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने ‌जयंत सिन्हा का टिकट काटकर अच्छा नहीं किया है । जबकि जयंत पूरी निष्ठा के साथ भारतीय जनता पार्टी के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे।
हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की ओर से मनीष जायसवाल को टिकट दिए जाने की घोषणा यशवंत सिन्हा काफी नाराज हुए। तभी उन्होंने मन बना लिया था कि जैसे भी हो, मनीष जायसवाल को हजारीबाग संसदीय लोकसभा क्षेत्र चुनाव से जीतने नहीं देंगे। उन्होंने हजारीबाग स्थित अपने आवास ऋषभ वाटिका से राजनीति शुरू कर दी । उनके यहां हजारीबाग जिले के कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता सहित विभिन्न पार्टियों के नेता गण पहुंचने लगे थे ।सबों ने मिलकर मनीष जायसवाल को कैसे चुनाव में पराजित किया जाए ? इसकी योजना बना डाली। इसी रणनीति और राजनीति के इन लोगों ने सबसे पहले मांडू विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे.पी. भाई पटेल को अपने विश्वास में लिया। उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट दिलवाने का आश्वासन दिया । साथ ही उन्हें चुनाव जीतने का भी आश्वासन दिया। यह योजना भावी राजनीति और हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने की उम्मीद को लेकर जे.पी. भाई पटेल ने भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ दिया था।
यशवंत सिन्हा खुलकर ऋषभ वाटिका से संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं ।‌ जे.पी. भाई पटेल को पूरी तरह सपोर्ट कर रहे हैं । यहां यशवंत सिन्हा चाणक्य की भूमिका में हैं वहीं जे.पी.भाई पटेल चंद्रगुप्त की भूमिका में नजर आ रहे हैं। चाणक्य यशवंत सिन्हा के इशारों पर चंद्रगुप्त बने जे.पी.भाई पटेल काम कर रहे हैं । यशवंत सिन्हा ने अपने संबोधन में यहां तक कहा कि मोदी को केंद्र से मुक्त करना है और मनीष जायसवाल को हजारीबाग से मुक्त करना है। चुनाव मनीष जायसवाल और जे.पी. भाई पटेल के बीच जरूर है, लेकिन यशवंत सिन्हा ने इस लोकसभा चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा बना लिया है। जिस आक्रामक रूप से यशवंत सिन्हा अपनी बातों को रख रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि यह चुनाव जे.पी. भाई पटेल नहीं बल्कि यशवंत सिन्हा चुनाव लड़ रहे हैं।
ध्यातव्य है कि जयंत सिन्हा हजारीबाग लोकसभा संसदीय लोकसभा क्षेत्र से सिटींग सांसद है । वे इस लोक सभा चुनाव में कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं । जब 2019 में लोकसभा का चुनाव जयंत सिन्हा लड़ रहे थे, तब मनीष जायसवाल उन्हें जिताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। जयंत सिन्हा 2019 का लोकसभा का चुनाव भारी मतों से जीते थे। जयंत सिन्हा का रुख क्या है? स्पष्ट रूप से अभी तक उभर कर सामने नहीं आया है। लेकिन यशवंत सिन्हा और जयंत सिन्हा से जुड़े भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता गण धीरे-धीरे कर भारतीय जनता पार्टी से ही नाता तोड़ते चले जा रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि इस इस राजनीति में परोक्ष रूप से जयंत सिन्हा शामिल नहीं है लेकिन अपरोक्ष रूप से जयंत सिन्हा और यशवंत सिन्हा शामिल हैं,ऐसा प्रतीत होता है।
मनीष जायसवाल को हराने के लिए यशवंत सिन्हा खुलकर मैदान में है, वही सिटिंग सांसद जयंत सिन्हा पूरे पिक्चर से ही गायब हैं। दूसरी ओर यशवंत सिन्हा ने अपने पोते आशीर सिन्हा को लोकसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस पार्टी की सदस्यता दिलवा दी है। राजनीतिक भविष्यवाणी करने वाले नेताओं का कहना है कि आगामी हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र से होने वाले चुनाव में आशीर सिन्हा कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे ।यह भविष्यवाणी कितना सच साबित होती है ? अब ज्यादे दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा बल्कि लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के कुछ ही महीने बाद इसी वर्ष झारखंड विधानसभा का चुनाव भी होना है।
मनीष जायसवाल और जे.पी. भाई पटेल दोनों हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने के जितने भी दावे कर लें, लेकिन कोई स्पष्ट तस्वीर और उभरकर सामने नहीं आ पा रही है । ऊपर से जनता की चुप्पी एक पहेली बन गई है। इसके पूर्व हजारीबाग संसदीय क्षेत्र से जितने भी चुनाव हुए थे, कुछ न कुछ स्पष्ट तस्वीर उभर कर सामने आ जाती थी। लेकिन इस बार ऐसी कोई तस्वीर उभर कर सामने नहीं आ पा रही है। इस बार राजनीतिक भविष्यवाणी कर्ता भी मौन है । जनता की इस चुप्पी के पीछे कौन सा राज छुपा है ? यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

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