पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से सेमिनार आयोजित

झारखंड में फूड प्रोसेसिंग की असीम संभावनाएं : सत्यानंद भोक्ता

Mar 26, 2022 - 13:11
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पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से सेमिनार आयोजित

रांची। झारखंड में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में असीम संभावनाएं हैं। कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विकास से आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलता है। इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ सामूहिक प्रयास जरूरी है। उक्त बातें झारखंड सरकार के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने शनिवार को एचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सौजन्य से होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से उद्योग को बढ़ावा देने के दिशा में राज्य सरकार सतत प्रयासरत है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से युवाओं को जोड़ने और उन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए योजनाएं बनाई गई है। कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों को मिल रहा है। सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ. योगेश श्रीवास्तव , असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल (पीएचडीसीसीआई) ने सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्टूडेंट हमारे देश के भविष्य हैं। हमे देश के युवाओं को फूड एंड कल्चर से जोड़ने के लिए उन्हें प्रेरित करने की जरूरत है । कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने झारखंड सरकार तक किसानों की समस्या बताने की बात कही।
डॉ.विशाल चौधरी, अध्यक्ष, झारखंड राज्य चैप्टर, पीएचडीसीसीआई ने कहा कि खूंटी जिले में लोग लाह की खेती कर रहे हैं और उससे जुड़े उत्‍पाद बना रहे हैं।
भारत फलों और सब्जियों के मामले में दूसरा सबसे बड़ा देश है।
कॉन्क्लेव में डॉ. विशाल चौधरी, अध्यक्ष,झारखंड राज्य चैप्टर पीएचडीसीसीआई, एससीगर्ग – डीजीएम, नाबार्ड, हर्षवर्धन,ज्ञइन्वेस्ट इंडिया, बेलमती जेनको, खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, मनीष पीयूष, पुरेश डेयरी, प्रो. डॉ. आरपी सिंह रतन झारखंड राय विश्वविद्यालय, डॉ. शालिनी लाल ,डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, प्रो. रेखा सिन्हा, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, सिककांता मंडल, सहायक कार्यकारी एपीडा उपस्थित थे।

विशिष्ट वक्ताओं ने कृषि के कई पहलुओं में महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों पर चर्चा की, जिसमें बाजारों तक पर्याप्त पहुंच, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पंक्तिबद्ध करना, फसलों के लिए बेहतर मुआवजा, कृषि विपणन के साथ-साथ उपज की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के तरीकों की तलाश करना शामिल है

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