झारखंड के डॉक्टरों ने हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश के सभी सरकारी डॉक्टरों ने 20 अगस्त 2024 से बायोमेट्रिक अटेंडेंस का विरोध करने का फैसला लिया है। सभी डॉक्टर ऑफलाइन माध्यम से रजिस्टर पर अपना अटेंडेंटस बनायेंगे। यह फैसला रविवार को करमटोली चौक स्थित आइएमए भवन में आयोजित स्टेट आइएमए और झासा की संयुक्त बैठक के बाद लिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग को बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से छूट दी जाए।
ग़ौरतलब है कि 05 अगस्त 2024 को जारी सरकारी आदेश में यह कहा गया है कि राज्य के सभी चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मियों को अटेंडेंस पोर्टल से हाजिरी बनाना अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य विभाग को भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से छूट दी जाये
स्टेट आइएमए के सचिव डॉ प्रदीप सिंह और झासा के सचिव डॉ ठाकुर मृत्युंजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बायोमेट्रिक अटेंडेंस के लिए ऑनलाइन पोर्टल लागू किया गया है। इसमें बायोमेट्रिक से अटेंडेंस नहीं बनाने वाले डॉक्टरों और पारा मेडिकल कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा जायेगा। उन्होंने कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद अनुशासनात्मक और वेतन कटौती जैसी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग को आकस्मिक सेवा मानते हुए बायोमेट्रिक अटेंडेंस से छूट दी गयी है। उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग को भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से छूट दी जाये या स्वास्थ्य विभाग को आकस्मिक सेवा में नहीं रखने की घोषणा की जाए।
डॉक्टर्स की सेवा अनिवार्य सेवा
झासा के प्रदेश महासचिव डॉ मृत्युंजय ने कहा कि डॉक्टर्स की सेवा अनिवार्य सेवा है और समय के साथ चिकित्सकों को नहीं बांधा जा सकता। जरूरत के वक्त रात हो या दिन चिकित्सक को बीमार मरीजों का इलाज करना पड़ता है। ऐसे में जिस तरह सरकार में अन्य जरूरी सेवा वाले विभागों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस से छूट मिली है, उसी तरह की व्यवस्था डॉक्टर्स के लिए भी हो। उन्होंने कहा कि राज्य के कई इलाकों में नेटवर्क की भी समस्या है। यहां तीन बार हाजिरी पोर्टल के माध्यम से नहीं बनाए जाने पर शो कॉज का प्रावधान सही नहीं है।
सभी सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर चले जाएंगे
झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेस एसोसिएशन (झासा) के अध्यक्ष डॉ. पीपी साह ने कहा कि 20 अगस्त के बाद कोई भी डॉक्टर बॉयोमेट्रिक पद्धति से हाजिरी नहीं बनाएंगे। अगर उनका वेतन विभाग काटता है या कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है तो राज्य भर के सभी सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर चले जाएंगे।
महिला चिकित्सकों के लिए चिंताजनक
आईएमए महिला विंग की स्टेट प्रेसिडेंट डॉ भारती कश्यप ने कहा कि सरकार के इस तुगलकी फरमान का सबसे खराब असर महिला डॉक्टरों पर पड़ेगा,क्योंकि उन्हें डिलीवरी या संस्थागत प्रसव के समय अक्सर ही वक्त-बेवक्त अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में आधि रात को अस्पताल पहुंचकर सिजेरियन करने वाली महिला चिकित्सक अगले दिन सुबह 09 बजे -10 बजे कैसे हाजिरी बनाएंगी, यह सरकार को सोचना चाहिए।
डॉक्टरों ने दो मिनट का मौन रखा
आईएमए झारखंड के महासचिव डॉ. प्रदीप सिंह ने झारखंड में हरियाणा की तर्ज पर 50 बेड से कम क्षमता वाले निजी क्लीनिक और अस्पतालों को क्लिनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत निबंधन से मुक्त करने की मांग की है। वहीं बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या मामले में शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने दो मिनट का मौन धारण कर मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।