पारस एचईसी हॉस्पिटल में अब कटे और क्षतिग्रस्त अंगों का भी इलाज होगा

पिछले 1 साल से राँची के पारस एचईसी अस्पताल में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी की विधि से लोगों को बेहतर जिंदगी देने का काम हो रहा है।

Dec 14, 2023 - 12:33
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पारस एचईसी हॉस्पिटल में अब कटे और क्षतिग्रस्त अंगों का भी इलाज होगा

नित्य नए आयाम पार करते हुए राँची के पारस एचईसी हॉस्पिटल में अब माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा भी हो गई है। पिछले 1 साल से राँची के पारस एचईसी अस्पताल में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी की विधि से लोगों को बेहतर जिंदगी देने का काम हो रहा है। पारस एचईसी अस्पताल के अनुभवी प्लास्टिक सर्जन डॉ. विवेक गोस्वामी के नेतृत्व में ये काम तेजी से अग्रसर हो रहा है। पारस एचईसी हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में हर तरह की माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी एवं पुनर्निर्माण विधि से सर्जरी हो रही है। इसमें मुख्य रूप से रीइम्प्लांटेशन सर्जरी, माइक्रोवैस्कुलर फ्री फ्लैप सर्जरी, ब्रैकियल प्लेक्सस सर्जरी, रिवैस्कुलराइजेशन सर्जरी, सिर और गर्दन की पुनर्निर्माण सर्जरी सहित लसीका सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

पुनः प्रत्यारोपण सर्जरी: 

शरीर से पूरी तरह से कटकर अलग हुए अंगों को वापस शरीर से जोड़ना। पारस एचईसी अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ विवेक गोस्वामी ने बताया कि किसी भी अप्रत्याशित दुर्घटना या मशीन से किसी मरीज़ का अंग पूरी तरह से कटकर शरीर से अलग हो जाने पर यदि मरीज़ को गोल्डन पीरियड के भीतर जो 6 घंटे होते हैं अस्पताल ले आया जाये तो उस अंग को वापस शरीर से जोड़ा जा सकता है। क़रीब 5 से 6 घंटे तक चलनेवाले ऑपरेशन की प्रक्रिया के बाद उस मरीज के कटे हुए अंग के सभी नसों, हड्डी और मांसपेशियों को फिर से जोड़ा जा सकता है। अगर शरीर का कोई अंग खराब हो गया है तो शरीर के किसी और अंग से मांस एवं हड्डियों को निकाल कर नसों द्वारा जोड़ा जाता है।ये ऑपरेशन लगभाग 3 से 4 घंटे चलती है। ब्रेकियल प्लेक्सस हाथों को चलाने वाली सबसे जरूरी नस होती है जो रीढ़ की हड्डी से निकलती है।दुर्घटना में कभी-कभी ये क्षतिग्रस्त या कट जाती है। इसको लगभग 6 घंटे के ऑपरेशन के बाद ठीक किया जाता है। शरीर के किसी भी हिस्से का प्रमुख खून का नस अगर कट जाए तो उसे वापस जोड़ने के लिए रीवास्कुलराइजेशन सर्जरी का सहारा लिया जाता है। इसमें शरीर के किसी और नस से या डैक्रोन ग्राफ्ट से नसों को वापस बनाया जाता है। पारस एचईसी अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने मौक़े पर कहा की हमें गर्व है की हम प्रदेश में असाध्य और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा देने में प्रमुखता से आगे बढ़ रहे हैं। फाइलेरिया रोग को माइक्रोवैस्कुलर विधि से ठीक करने के लिए अब रांची के पारस एचईसी अस्पताल में इलाज भी शुरू हो गया है।

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