625 चिटफंड कंपनियों पर FIR करने का निर्देश, अवैध तरीक़े से 400 करोड़ जमा लिए

इस बात का भी अंदेशा जताया जा रहा है कि कहीं ये कंपनियां पश्चिम बंगाल के शारदा घोटाले की तरह बिहार के गरीब लोगों की गाढ़ी कमाई लेकर चंपत न हो जाएं.

Aug 10, 2024 - 15:35
Aug 10, 2024 - 15:51
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625 चिटफंड कंपनियों पर FIR करने का निर्देश, अवैध तरीक़े से 400 करोड़ जमा लिए

बिहार में ग्रामीणों सहित लाखों निवेशकों को मुनाफ़े का सब्ज़बाग दिखाकर उनसे मोटे रक़म ऐंठनेवाली लगभग 6 सौ से भी ज़्यादा कंपनियों पर अब सरकार ने नकेल कसने की प्रक्रिया शुरू की है. जानकारी के अनुसार बिहार के लाखों लोगों से अवैध तरीके से कई निधि कंपनियां पैसे जमा ले रही हैं. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने अवैध तरीके से जमा ले रहीं 625 निधि कंपनियों पर एफआइआर करने का निर्देश दिया है. इन कंपनियों में चार सौ करोड़ से अधिक जमा होने की संभावना जतायी जा रही है. इस बात का भी अंदेशा जताया जा रहा है कि कहीं ये कंपनियां पश्चिम बंगाल के शारदा घोटाले की तरह बिहार के गरीब लोगों की गाढ़ी कमाई लेकर चंपत न हो जाएं.

दरअसल, केंद्र सरकार ने मंत्रालय से पंजीकृत ऐसी निधि कंपनियों का राज्य में सर्वे करवाया, जो नियमों को अनुपालन नहीं कर रही थी और लोगों से जमा ले रही थी. सर्वे की टीम जब पंजीकृत निधि कंपनियों द्वारा दिये गये एड्रेस पर गयी तो उन्हें कंपनी के फर्जी होने का आभास हुआ. आसपास के लोगों को भी ऐसी कंपनियों की जानकारी नहीं थी. मंत्रालय ने इसकी सूचना वित्त विभाग को देते हुए राज्य में अवैध संचालित निधि कंपनियों पर नजर रखने के लिए कहा है. साथ ही संबंधित जिलों के एसएसपी को एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है. इससे पहले भी मंत्रालय ने 342 कंपनियों पर एफआइआर दर्ज करने के लिए कहा था.

ऐसे काम करती है कंपनियाँ 

अधिकतर चिटफंड कंपनियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती है. ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोज़गार युवक मोटे कमीशन के लालच में कंपनी से जुड़कर काम करने लगते हैं. इन युवकों को ग्रामीणों से छोटी-छोटी रक़म जमा करने को कहा जाता है. शुरुआत में ऐसी कंपनियाँ लोगों को अच्छा रिटर्न भी देती है, साथ एजेंटों को भरपूर कमीशन भी मिलता है. लेकिन जैसे ही कंपनी में जमा राशि अधिक हो जाती है ये कंपनियाँ ग़ायब हो जाती है. हर साल कई कंपनियाँ पैसे लेकर भाग रही है. 

आमलोगों से रुपया जमा लेने का अधिकार नहीं

निधि (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत निधि कंपनियों को सीधे आमलोगों से जमा लेने का अधिकार नहीं है. ये कंपनियां केवल अपने सदस्यों के बीच लेने देन कर सकती हैं. नियमानुसार इन कंपनियों को एनडीएच-4 फॉर्म भरना अनिवार्य है, ताकि यह पता चल सके कि वे केंद्र सरकार के नियम-कायदों का अक्षरश: पालन कर रही हैं. यह एक तरह से घोषणापत्र है. इसमें कंपनी के सभी सदस्यों का नाम और पता रहता है. एमसीए में पंजीकृत वैसी निधि कंपनियां जिन्होंने एनडीएच-4 फॉर्म नहीं भरा है, वे जमा नहीं ले सकती हैं.

MCA ने दिया FIR का निर्देश 

राज्य में अवैध तरीके से जमा ले रही निधि कंपनियों को लेकर विधानसभा में विधायकों ने सवाल उठाये थे. इसके बाद वित्त विभाग ने मंत्रालय से पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की थी. उसके बाद MCA ने निधि कपंनियों को लेकर सर्वे करवाया और FIR दर्ज करने का आदेश दिया.

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