28-29 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल करने के लिए बैंककर्मियों का प्रदर्शन

ग्राहकों की जमा राशि पर ब्याज की दर में बढ़ोतरी तथा सेवा शुल्क कम करने की मांग को लेकर भी आंदोलन जारी है।

Mar 25, 2022 - 13:22
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28-29 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल करने के लिए बैंककर्मियों का प्रदर्शन

केन्द्र सरकार की नीतियों के विरूद्ध केन्द्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा 28-29 मार्च 2022 को प्रस्तावित दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल करने के लिए बैंक कर्मियों शुक्रवार को संध्या 5:30 बजे सैनिक मार्केट, रांची के समक्ष तख्ती लेकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इसमें बैंक कर्मियों के अलावा अन्य संगठन के लोगों ने भी हिस्सा लिया। महिला कर्मियों की उपस्थिति भी सराहनीय रही। केन्द्रीय श्रमिक संगठनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा के मांगों के समर्थन के अलावा संगठन बैंकों के निजीकरण का विरोध, सार्वजनिक क्षेत्रों को बेचे जाने का विरोध, राष्ट्रीय मुदीकरण पाइपलाईन की समाप्ति, 4 लेबर कोड रद्द करने, एनपीएस को रद कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने, दैनिक व अस्थायी मजदूरों / संविदा / पीसी आदि कर्मियों की सेवा स्थायी करने, आउटसोर्सिंग को बंद कर रिक्त स्थानों पर बहाली आदि को लेकर है। इसके अलावा ग्राहकों की जमा राशि पर ब्याज की दर में बढ़ोतरी तथा सेवा शुल्क कम करने की मांग को लेकर भी आंदोलन जारी है।
संयोजक एमएल सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार को स्पष्ट करना चाहते हैं कि बैंकों का या सार्वजनिक क्षेत्रों को निजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है, उसे सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। इसके लिए एनपीए के अंतर्गत जो समस्या है उसकी नीति परिवर्तन कर जानबूझकर बड़े-बड़े कॉरपोरेट जो ऋण नहीं चुका रहे हैं उसकी वसूली की जाय तथा इस तरह की कार्रवाई को अपराध घोषित कर उनपर सख्त कारवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एनपीए की राशि में अपार बढ़ोत्तरी ‘राईट ऑफ तथा हेयरकट’ आदि के लिए वर्तमान सरकार की गलत नीतियां जवाबदेह है।

उन्होंने कहा कि सभी अच्छी तरह अवगत हैं कि स्वतंत्रता के पूर्व तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के 22 वर्षों तक निजी क्षेत्र के ही बैंक थे। उसमें 600 से ज्यादा बैंक फेल एवं दिवालिया हो गए। आम जनता की गाढ़ी कमाई डूब गई। आम जनता एवं श्रमिक संगठनों के -आंदोलन के कारण बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना की गई। इनकी भूमिका से सभी अवगत हैं। 1969 के बाद निजी क्षेत्र के 38 बैंक दिवालिया हुए। जिन्हें आम जनता की पूंजी के हित को देखते हुए पीएसबी के साथ विलय किया गया। अभी भी पीएसबी लगातार आपरेटिंग लाभ कमा रहे हैं। पिछले वर्ष 197000 करोड़ रुपये हुआ है। हमारी स्पष्ट सोच है कि “जनता की पूंजी जनता के कल्याण के लिये हो न कि कॉरपोरेट की लूट के लिये।

उन्होंने आम जनता, ग्राहकों, मजदूरों, किसानों, छात्र एवं नवयुवकों से अपील किया है कि जनता बचाओ, देश बचाओं के मद्देनजर दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल करने में अपना सहयोग दें।
इस अवसर पर आरके सिंह, केआर. चौधरी, योगेन्द्र कुमार महतो, मुरलीधर राम (आईएनबीओसी), अनिर्वाण बोस (बीएसएसआर), प्रकाश विप्लव (सीआईटीयू) ने सम्बोधित किया।

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