उपभोक्तावादी मानसिकता से ऊपर उठकर प्रकृति के साथ संतुलन में रहकर विकास कार्य करने की है आवश्यकता, भारतीय मनीषियों से प्राप्त ज्ञान की जड़ों को नष्ट होने से बचाने के लिए करने होंगे प्रयत्न

उपभोक्तावादी मानसिकता से ऊपर उठकर प्रकृति के साथ संतुलन में रहकर विकास कार्य करने की है आवश्यकता, भारतीय मनीषियों से प्राप्त ज्ञान की जड़ों को नष्ट होने से बचाने के लिए करने होंगे प्रयत्न

Feb 22, 2026 - 01:02
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उपभोक्तावादी मानसिकता से ऊपर उठकर प्रकृति के साथ संतुलन में रहकर विकास कार्य करने की है आवश्यकता, भारतीय मनीषियों से प्राप्त ज्ञान की जड़ों को नष्ट होने से बचाने के लिए करने होंगे प्रयत्न

गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने यूजीसी के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) के तत्वावधान में पटना विश्वविद्यालय के साइंस कॉलेज, पटना में "इंटीग्रेशन अॉफ इंडियन नॉलेज सिस्टम इन करिकुलम" विषय पर आयोजित छः-दिवसीय "कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम" में बतौर अतिथि वक्ता भाग लिया। 16 से 21 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस प्रधानाचार्या डॉ पटेल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर के रूप में बिहार राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, जैसे मगध, वीकेएसयू, पाटलिपुत्रा, पटना, मुंगेर मिथिला आदि से आए साठ प्रतिभागी प्रशिक्षु शिक्षकों को पारम्परिक कृषि परम्परा और पारम्परिक वनस्पति विज्ञान में प्रशिक्षित किया। 

प्रधानाचार्या डॉ पटेल ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत मे कृषि का इतिहास, पूर्व के ऋषियों और आचार्य के कृषि संबंधित साहित्यों, ऋग्वेद, तैत्तिरीय उपनिषद, कृषि पराशर, बृहत्संहिता, घाघ भड्डरी आदि में उल्लिखित कृषि  ज्ञान पर प्रकाश डाला। डॉ पटेल ने बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों, कृषकों पर पैदावार बढ़ाने के दबावों, पूर्वजों से प्राप्त जैविक और नैतिक कृषि पद्वतियों के संरक्षण, जैविक उर्वरक, जैविक कीटनाशक, मृदा स्वास्थ्य, स्वास्थ्यवर्धक अनाजों की उपज, उपभोक्ताओं के उचित पोषण, बीमारियों से बचाव जैसे विषयों पर अपने बहुमूल्य विचार रखे। उन्होंने विभिन्न सतत तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर चर्चा करते हुए वनस्पति विज्ञान की प्राचीन और आधुनिक व्यवस्थाओं की अच्छाइयों को शोध और शिक्षा में समाहित करने की बात कही। कहा कि हमें भारतीय मनीषियों से प्राप्त ज्ञान की जड़ों को नष्ट होने से बचाने के लिए प्रयत्न करने चाहिए। उपभोक्तावादी मानसिकता से ऊपर उठकर प्रकृति के साथ संतुलन में रहकर विकास कार्य करने होंगे।

कॉलेज की पीआरओ डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित इस फैकल्टी डेवेलपमेंट प्रोग्राम में कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ शुचि सिन्हा एवं डॉ सीता भी भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में डॉ जितेंद्र कुमार ने पारंपरिक जल प्रबंधन तथा आयुर्वेद पर व्याख्यान दिया। वहीं कुलसचिव प्रोफेसर शालिनी ने भारतीय ज्ञान परम्परा में शिक्षा पर अपने विचार साझा किए। एमएमटीसी के निदेशक प्रोफेसर अतुल आदित्य पांडेय ने प्रधानाचार्या डॉ पटेल सहित सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। ज्ञातव्य है कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक अंतर्विषयक दृष्टिकोण है, जो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है। इसका मुख्य प्रयोजन भारत की प्राचीन सभ्यता, विज्ञान, गणित, दर्शन, चिकित्सा (आयुर्वेद) और कला को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर छात्रों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना का विकास करना है। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एईपी) 2020 के तहत इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस) या भारतीय ज्ञान प्रणाली को स्कूली और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा को पाठ्यक्रम में पूर्णतः शामिल करने से पूर्व सभी राज्यो में शिक्षकों की 6 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, ताकि उस राज्य के महाविद्यालयों के शिक्षक इस क्षेत्र में अपनी क्षमता विकास कर सके।

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