विश्व आदिवासी दिवस पर किसानों को मिला 734 करोड़ का तोहफा

ग्रामीण क्षेत्र के किसानों एवं खेतिहर मजदूरों के लिए खेत उनका बैंक और पशुधन एटीएम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा जो किसान के रूप में है वे अपने खेती-बारी से ही जीवन यापन करते हैं

Aug 10, 2021 - 13:39
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विश्व आदिवासी दिवस पर किसानों को मिला 734 करोड़ का तोहफा

रांची: झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आजादी के पहले से ही झारखंड के पूर्वजों ने अपनी आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया था, सरकार उनके दिखाये रास्ते पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपारिक आय के साधनों में कमी आयी है। कमियों और खामियों की वजह से ग्रामीण किसान वनोपज जैसे आय के स्रोतों को धीरे-धीरे छोड़ते चले आए। सीएम ने कहा कि लाह और सिल्क का उत्पादन झारखंड राज्य में सबसे अधिक होता है परंतु इन संपदाओं का पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। किसान भाई मेहनत करते हैं और फल दूसरे लोग खा रहे हैं। अब सरकार वनोपज के लिए व्यवस्था दुरुस्त करने में लगी है। किसानों को वनोपज के लिए बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध हो सके इस निमित्त प्रतिबद्धता के साथ कार्य किए जा रहे हैं। जल्द ही बन उपज के विस्तार के लिए फेडरेशन बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों एवं खेतिहर मजदूरों के लिए खेत उनका बैंक और पशुधन एटीएम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा जो किसान के रूप में है वे अपने खेती-बारी से ही जीवन यापन करते हैं। पशुपालन तथा पशुधन उनके लिए आय का सरल साधन है। ग्रामीण लोगों के लिए कुछ वर्ष पहले तक पशुधन ही पूंजी हुआ करती थी परंतु धीरे-धीरे यह पूंजी कहां गायब हो गई यह समझ पाना बहुत ही मुश्किल है। एक समय ऐसा था जब लोग गांवों में झुंड के झुंड जानवर लेकर चराने के लिए जाया करते थे ऐसी तस्वीरें अब देखने को नहीं मिल रही हैं। पशुधन जैसे आय के स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पशुपालन पर विशेष बल दिया है।

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