कोरोना काल में तुषार कांति ने पेश की मानव सेवा की अद्भुत मिसाल

Jul 11, 2021 - 13:36
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कोरोना काल में तुषार कांति ने पेश की मानव सेवा की अद्भुत मिसाल

रांची। राजधानी के निवारणपुर स्थित आम्रपाली अपार्टमेंट निवासी व शहर के लोकप्रिय समाजसेवी तुषार कांति शीट ने कोरोना संक्रमण काल में बढ़-चढ़कर पीड़ितों की सेवा की। वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान उन्होंने शहर स्थित स्लम एरिया के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा के प्रति समर्पित भाव से जुटे रहे। उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में अद्भुत मिसाल पेश की है। समाजसेवा के प्रति उनके जज्बे और जुनून को देखकर अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी कोरोना संक्रमण काल के दौरान लोगों की सेवा में लगे रहे।
परोपकार और समाजसेवा का जुनून उनके सिर चढ़कर बोलता है। उनके द्वारा किए गए कार्य समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए अनुकरणीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत भी है। समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने और इस क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए देश की दर्जनाधिक नामचीन संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।
श्री शीट शहर की ख्यातिप्राप्त सामाजिक संस्था श्रीरामकृष्ण सेवा संघ के सहायक सचिव हैं। मानव सेवा के प्रति उनकी अभिरुचि बचपन से ही रही है। छात्र जीवन से ही उन्होंने मानवसेवा के क्षेत्र में बढ़ -चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया। स्कूली शिक्षा प्राप्त करते समय ही उन्होंने आगे चलकर अपने कैरियर निर्माण के अलावा समाज सेवा करने का भी संकल्प लिया। अपनी पारिवारिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए वह सामाजिक कार्यो में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वह बताते हैं कि अबतक तकरीबन छह हजार शवों के अंतिम संस्कार में शामिल हो चुके हैं। वहीं, अपने स्तर से दर्जनों लावारिस लाशों की अंत्येष्टि कराकर उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया है।
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित गोविंदपुर गांव निवासी श्री शीट इस संबंध में रोचक जानकारी देते हुए बताते हैं कि उन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के क्रम में सहपाठियों की एक टोली बनाई थी। गांव में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी, तो उसके अंतिम संस्कार में उपयोगी सामग्री को सब मिलजुल कर इकट्ठा करते थे और संबंधित परिजनों को उपलब्ध करा देते थे। मृतक की अंतिम यात्रा में सभी शामिल होते थे। पढ़ाई के दौरान गांव में यह सिलसिला लगातार जारी रहा। तत्पश्चात नौकरी की तलाश में वर्ष 1990 में रांची आए। यहां अपने व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की। शहर आने के बाद समाजसेवा का जुनून और परवान चढ़ने लगा। आसपास में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती थी, तो उनके अंतिम संस्कार के लिए सामान जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे। उन्हें पता चलता कि किसी व्यक्ति की मौत हो गई है और उसके परिजन उसका अंतिम संस्कार करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं, वैसे लोगों को उन्होंने मदद पहुंचाना शुरू किया। कई लावारिस लाशों की अंत्येष्टि उन्होंने अपने खर्च पर कराई। श्री शीट बताते हैं कि अबतक 70 लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार वह अपने खर्च पर करा चुके हैं।
श्री शीट पर्यावरण प्रेमी और पशुप्रेमी भी हैं। वह कहते हैं कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

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