आईपीआरडी में विज्ञापन घोटाला और भेदभाव की नीति-प्रीतम भाटिया

पहली बार किसी संगठन के मुखिया ने आईपीआरडी पर एक खबर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं.पहली बार किसी संगठन ने आश्चर्यजनक खुलासे किएं हैं जिसे समझना जरूरी है.

May 27, 2021 - 13:41
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आईपीआरडी में विज्ञापन घोटाला और भेदभाव की नीति-प्रीतम भाटिया


रांची :

बताते चलें कि विद्रोही 24 की खबर को ट्वीट करते हुए AISMJWA एसोसिएशन के बिहार/झारखंड और बंगाल प्रभारी प्रीतम सिंह भाटिया ने मुख्यमंत्री से सवाल किए हैं कि एक खबर में बताया गया है कि रांची के एक निजी अखबार में पत्रकारों का वेतन बंद कर दिया गया है किंतु उसे अखबार छापे बिना ही सरकारी विज्ञापन हेतु बड़ा घोटाला किया गया है.इस घोटाले का खुलासा उसी अखबार के संपादक उमाकांत महतो ने किया है.
इस पर प्रदेश प्रभारी प्रीतम भाटिया ने सीएम को ट्वीट कर कहा है कि हेमंत सोरेन जी आईपीआरडी आपके अधीन है जिस पर घोटाले का आरोप लगा है . यह कोई नई बात नहीं है बल्कि यहां वर्षों से घोटाला चला आ रहा है.बताते चलें कि राज्य में कई अखबार और चैनल ऐसे हैं जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर कई वर्षों से विज्ञापन दिया जा रहा है जबकि दर्जनों छोटे पत्र-पत्रिकाओं के विज्ञापन लगभग बंद कर दिए गए हैं ताकि कुछ चोरों का पेट भर सके.
इसको लेकर एसोसिएशन ने कई बार आवाज उठाई थी कि छोटे और मझोले अखबार जो झारखंड से प्रकाशित होते हैं उनका अधिकार विज्ञापन पर पहले बनता है इसलिए उनके सरकुलेशन को देखकर विज्ञापन की दर तय की जाए और पुनः संशोधन कर नई विज्ञापन नीति बनाई जाए.

विज्ञापन नीति बनाकर इसका 20% हिस्सा पत्रकार कल्याण कोष को दिया जाना चाहिए-रामप्रवेश सिहं
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रवेश सिंह ने कहा है कि हाऊस द्वारा 70% पत्रकारों को वेतन नहीं बल्कि संवाद सूत्र बताकर पेट्रोल व मोबाईल खर्च ही दिया जाता है यह सभी जानते हैं.देश भर में कुछ ही पत्रकारों को केवल वेतन,पीएफ और ईएसआई की सुविधाएं मिलती हैं इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता इसलिए बेहतर होगा कि हाऊस को मिल रहे सरकारी विज्ञापन का 20% हिस्सा काटकर उसे पत्रकार कल्याण कोष में जमा किया जाए ताकि बीमारी और मृत्यु जैसी गंभीर परिस्थिति में पत्रकारों का कल्याण हो सके और सरकार पर दबाव की नौबत ही ना आए.

सरकार को ठोस नीति बनाने की है जरूरत-सुनील पांडेय
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव सुनील पांडे ने कहा है कि कुछ हाउस पत्रकारों का सबसे बड़ा शोषक ही नहीं बल्कि दुश्मन भी है जो शहादत के बाद उसे अपना पत्रकार तक मानने से इंकार कर देता है.राज्य में पत्रकारों के शोषण के ऐसे 100 से भी ज्यादा मामले मिल जाएंगे लेकिन सवाल है कि इस तरह के मामलों पर आज तक किसी भी संगठन ने संज्ञान नहीं लिया है अब उम्मीद है एसोसिएशन ही इस पर सख्त कार्रवाई करेगा.

एक्रिडेशन तक में हो रहा है भेदभाव-शंकर गुप्ता
एसोसिएशन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शंकर गुप्ता ने कहा है कि राज्य में पत्रकारों को मिलने वाला एक सस्ता सा आईडी कार्ड एक्रीडिटेशन को लेकर भी भारी मतभेद देखने को मिल रहा है.ऐसे में आईपीआरडी के खिलाफ लगातार खुलकर शिकायत करने वाला राज्य का पहला संगठन AISMJWA एसोसिएशन ही है जिसने आईपीआरडी में ईमानदार निदेशक को उस पद पर नियुक्त करने की मांग सरकार से पत्र लिखकर की है ताकि ऐसे ही कुछ घोटाले बंद हों.

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